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माँ-बाप वो दरख़्त हैं, जिनकी छांव में पूरी ज़िंदगी गुज़र जाए तो भी कम लगे। वो बिना थके, बिना रुके हमें सहारा देते हैं। उनके बिना…

रिश्ते नाम से बहुत खूबसूरत लगते हैं – माँ-बाप, भाई-बहन, दोस्ती, मोहब्बत… लेकिन हर रिश्ता हमेशा मीठा नहीं होता। कभी-कभी रिश्ते उम्मीदों का बोझ, स्वार्थ का…

“मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग आते गए और कारवाँ बनता गया।” – मजरूह सुलतानपुरी ये शेर सिर्फ़ सफ़र की बात नहीं करता –…

सआदत हसन मंटो उर्दू साहित्य के सबसे बेबाक, विवादित और ईमानदार कहानीकारों में से एक थे। वो लिखते नहीं थे – जैसे समाज को आईना पकड़ा…

ये शेर सिर्फ़ मोहब्बत से जुड़ा नहीं है, ये एक समाजिक चेतना का प्रतीक है। फैज़ साहब ने इस शेर के ज़रिए बताया कि इश्क़ ज़रूरी…

क़ाफ़िया उर्दू शायरी का एक अहम हिस्सा है। इसका मतलब है – कविता या शेर की आख़िरी लाइनों में मिलने वाले मिलते-जुलते लफ़्ज़। ये वो शब्द…